Thursday, December 31, 2020

मुरूदेश्वर मंदिर की ऊंचाई 249 फीट है।

महा मेरु श्री यंत्र मंदिर दो तरफ से जंगल से घिरा हुआ है, प्राचीन और पवित्र बट्टे कृष्ण कुंड, इसके पश्चिम में एक तालाब और इसके उत्तर में एक जल भंडार है। मंदिर का निर्माण पहाड़ों के मैकल, सतपुडा और विंध्याचल श्रेणी के मध्य में किया गया है।

अमरकंटक, मध्य प्रदेश।🇮🇳

विशाल मंदिर के प्रवेश द्वार पर प्रवेश एक प्रभावशाली, मूर्तिकला से समृद्ध मीनार का द्वार है, जिसके चारों ओर देवी सरस्वती, काली, भुवनेश्वरी और लक्ष्मी के चेहरे हैं।

इन पक्षों के निचले खंडों को तांत्रिक पंथ से जुड़े 64 योगिनियों की बारीक मूर्तियों से सजाया गया है, हर तरफ 16 हैं। इसके अलावा, गणेश और कार्तिक को एक तरफ भी चित्रित किया गया है।

मंदिर, हम कहा जाता है, मंदिर वास्तुकला के सिद्धांतों पर ऋषि अगस्त्य द्वारा निर्धारित किया गया है।

Thursday, December 17, 2020

महाराणाप्रतापजी का प्रिय हाथी रामप्रसाद



महाराणा प्रताप का चेतक ही नहीं ' रामप्रसाद ' भी था स्वामिभक्त, अकबर की गुलामी नहीं की थी स्वीकार.. 
प्रताप गौरव केंद्र में महाराणा प्रताप और उनके प्रिय हाथी की प्रतिमा लगाई गई है।महाराणा प्रताप का हाथी रामप्रसाद इतना समझदार व ताकतवर था कि उसने हल्दीघाटी के युद्ध में अकेले ही अकबर के 13 हाथियों को मार गिराया था।
महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक के बारे में तो सुना ही होगा लेकिन उनका एक हाथी भी था जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। उदयपुर के टाइगर हिल स्थित प्रताप गौरव केंद्र में महाराणा प्रताप और उनके प्रिय हाथी की प्रतिमा लगाई गई है जो उनका प्रेम बयां करती है। इसका विवरण वहां दिया गया है।

दरअसल, रामप्रसाद हाथी का उल्लेख अल बदायूंनी ने जो मुगलों की ओर से हल्दीघाटी के युद्ध में लड़ा था ने अपने एक ग्रन्थ में किया है। वो लिखता है कि जब महाराणा पर अकबर ने चढ़ाई की थी तब उसने दो चीजों को बंदी बनाने की मांग की थी एक तो खुद महाराणा और दूसरा उनका हाथी रामप्रसाद।

महाराणा प्रताप का हाथी रामप्रसाद इतना समझदार व ताकतवर था कि उसने हल्दीघाटी के युद्ध में अकेले ही अकबर के 13 हाथियों को मार गिराया था और उस हाथी को पकडऩे के लिए  7 हाथियों का एक चक्रव्यूह बनाया था और उन पर 14 महावतों को बिठाया तब कहीं जाके उसे बंदी बना पाए थे। अकबर ने उसका नाम पीरप्रसाद रखा था। रामप्रसाद को मुगलों ने गन्ने और पानी दिया पर उस स्वामिभक्त हाथी ने 18 दिन तक मुगलों का न दाना खाया और न पानी पीया और वो शहीद हो गया तब अकबर ने कहा था कि 'जिसके हाथी को मैं मेरे सामने नहीं झुका पाया उस महाराणा प्रताप को क्या झुका पाऊंगा।

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